मेरे प्रिये पाठकों
दौड़ भाग की इस जिन्दगी में हम खरीदारी करते समय सहसा फलना एड यानि प्रचार के बारे में sochate हैं अरे यार ये ठीक है इसे ले लेते हैं ये तोह सिर्फ़ एक नमूना है हम अपनी ज़िन्दगी में वाकई इतने गुम होते हैं की हमें इस एड जो कुछ कहता के बारे में sochate ही फैसले ले लेते हैं येःएड को घोर से देखे तोह आपके गले तक आ पहुची है राजनितिक सामाजिक आर्थिक या फिर महोली हर तरह के विज्ञापन का दौर इंसान को एक भयावह ओर कभी ना ख़तम होने वाली दौड़ में झोंके हुए hai----aor mahanagaron mein to inki tuti bolati hai
पाठकों मैं अपने इस ब्लॉग की शरुआत एक ऐसे ही एड यानि विज्ञापन यानि प्रचार से कर रहा हूँ जो कुछ कहता है
यूनिवर्सिटी की पढाई के लिए मैं ऑस्ट्रेलिया जा रही हूँ
पास बैठा बच्चा जो कुछ खा रहा होता है अपने पापा की ओर देखते हुए कहता है
पापा सोचा
पापा क्या बेटा
मेरे फ्यूचर के बारे में
तभी बजाज एलाएंस का एक आदमी अपने बहुत प्रभावशाली पञ्च लाइन के साथ हाज़िर होता है
कभी आपने बड़े होने के बाद भी अपने माँ बाप से ऐसे सवाल किए हैं आप अपने फैसले ज़रूर ले सकते हैं लेकिन आपने कभी अपने माँ बाप को ऐसे सवालों के फेर में डाला है मुझे तोह कभी ख्याल नही आया की मैं अपने पापा से ऐसे सवाल करू
हाँ आर्ट्स ओर साइंस पर कभी विवाद ज़रूर हुआ था
खैर बात इस ख़ास एड की वाकई बहुत बढ़िया विज्ञापन है बच्चे ने जिस मासोमि़त ओर किउट अंदाज़ में ये सवाल किया हैं की बजाज एलाएंस तो क्या किसी भी इन्सुरेंस कंपनी से तुंरत bachchey ke fuchar kaa insorance kara hi lenge माँ बाप----लेकिन सवाल एक बार फिर वही अब एड का मार्केट माँ की कोख तक जा पंहुचा है---इसके बारे में अगले एड कुछ कहता का इंतज़ार कीजिये
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